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प्यास बुझाने को अंटार्कटिका से बर्फ का पहाड़ खींचकर लाएगा UAE, 10 लाख लोगों को 5 साल तक मिलेगा पानी

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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) अब पानी की समस्या से निपटने के लिए आइसबर्ग (बर्फ का टुकड़ा) का इस्तेमाल करेगा. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अबुधाबी की एक कंपनी ने आइसबर्ग से पीने का पानी निकालने की योजना तैयार की है. कंपनी ने बताया है कि इस योजना के तहत करीब 12,600 किलोमीटर दूर अंटार्टिक से आइसबर्ग खींचकर यूएई लाया जाएगा. एक आइसबर्ग से 10 लाख लोगों के लिए 5 साल तक पीने के पानी का इंतजाम किया जाएगा.

वर्ष 2018 में शुरू होगा प्रोजेक्ट
संयुक्त अरब अमीरात में पानी की काफी समस्या है और इसका नाम सूखाग्रस्त देशों की टॉप टेन लिस्ट में है. आने वाले 25 वर्षों में यहां इतना सूखा पड़ सकता है कि लोगों का जीवन दूभर हो जाएगा. कंपनी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2018 में की जाएगी.

ऐसे मिलेगा पीने का पानी
एक आइसबर्ग को यूएई के समुद्री तट तक लाने में लगभग एक साल लगेंगे. उसके बाद आइसबर्ग को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर बॉक्‍स में भर दिया जाएगा. सूरज की गर्मी से जब बर्फ पिघलेगी तो उससे निकलने वाले पानी को एक अलग टैंक में इकट्ठा कर लिया जाएगा. फिर इस पानी को प्‍यूरीफॉई करके पीने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

इस योजना से बढ़ेगी बारिश की संभावना
रिपोर्ट के मुताबिक औसतन एक आइसबर्ग से 20 बिलियन गैलेन पानी निकाला जा सकता है. इतना पानी यूएई में रहने वालों के लिए पर्याप्‍त होगा क्‍योंकि वहां जनसंख्‍या ज्‍यादा नहीं है. यही नहीं जब आइसबर्ग को समुद्र तट के किनारे रखेंगे तो उससे वहां के वातावरण में भी नमी आएगी. इससे बारिश होने की संभावना बढ़ेगी. अभी तक यूएई में सालाना 100 मिमी बारिश होती है.

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सार्क सैटेलाइट प्रोजेक्ट पर PAK ने बदला बयान, कहा- भारत ने साथ नहीं रखा

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पाकिस्तान ने सार्क सैटेलाइट प्रोजेक्ट से खुद को अलग किए जाने के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि नई दिल्ली सभी के सहयोग से उपक्रम विकसित करने का इच्छुक नहीं है. इससे पहले पाक ने यह कहते हुए खुद को इस प्रोजेक्ट से अलग कर लिया था कि उसका अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम है. वहीं, दूसरी तरफ, बांग्लादेश ने कहा कि भारत के इस कदम से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा.

पाकिस्तान ने यह दावा उस वक्त किया है, जब भारत ने पड़ोसी देशों के संचार एवं आपदा संबंधी सहयोग देने के मकसद से दक्षिण एशिया उपग्र ह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है. पाकिस्तानी विदेश विभाग के प्रवक्ता नफीस जकरिया ने कहा कि 18वें सार्क शिखर बैठक के दौरान भारत ने सदस्य देशों को सार्क सैटेलाइट का तोहफा देने की पेशकश की थी.

बहरहाल, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह इसका अकेले निर्माण करेगा, प्रक्षेपण करेगा और संचालन भी करेगा. उधर, बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि दक्षिण एशिया उपग्रह के प्रक्षेपण के बाद बांग्लादेश और भारत के जल, थल और वायु में सहयोग का विस्तार हुआ है.

हसीना ने कहा, ‘मेरा यह मानना है कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लोगों की भलाई यहां के देशों के बीच सहयोग के कई क्षेत्रों में सार्थक संपर्क पर निर्भर करता है.’ मालूम हो कि शुक्रवार को भारत ने सार्क देशों के बीच संचार और संपर्क को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण एशिया सैटेलाइट जीसैट-9 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया.

इस सैटेलाइट को इसरो ने बनाया है. इस कामयाबी के बाद सार्क देशों के 6 राष्ट्राध्यक्षों ने एक साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दुनिया को संदेश दिया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि जीसैट-9 से भारत, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, अफगानिस्तान, भूटान और मालदीव को फायदा होगा. इससे अंतरिक्ष में दक्षिण एशिया की ताकत बढ़ेगी.

इसे भी पढ़िएः 450 करोड़ की लागत से बने SAARC सैटेलाइट की 10 खास बातें

ऐसे सार्क सैटेलाइट प्रोजेक्ट से बाहर हुआ पाक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब सार्क सैटेलाइट का आइडिया पड़ोसी देशों के समक्ष रखा. उस समय पाकिस्तान ने इस कदम का स्वागत किया. प्रधानमंत्री के विचार पर जोश भरी प्रतिक्रिया देते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने कहा कि उनका देश इस प्रस्ताव पर रचनात्मक सुझाव देगा. हालांकि कुछ दिन बाद ही पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट में साझीदार बनने की बात कही. पाकिस्तान ने इस पर जोर दिया कि उसे इसरो की टेक्निकल टीम का हिस्सा बनाया जाए. साथ ही उसने भारत के साथ इस प्रोजेक्ट का खर्च उठाने का भी प्रस्ताव रखा, जिसे भारत ने खारिज कर दिया. इसके बाद पाकिस्तान ने मांग रखी कि सैटेलाइट का कंट्रोल का सार्क देशों को दिया जाए न कि सिर्फ इसरो के पास रहे. यही नहीं पाकिस्तान ने फिर सुरक्षा का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया, जिसे भारत ने खारिज कर दिया. इसके बाद पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट से खुद को अलग कर लिया. उनकी दलील थी कि उनके पास अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम है.

12 साल है जीसैट-9 की लाइफटाइम
जीसैट को चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांचिंग पैड से लांच किया गया. इसरो ने बताया कि जीसैट-9 मिशन का लाइफटाइम 12 साल का है.

PM मोदी की स्पेस डिप्लोमेसी

मई 2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों से सार्क सैटेलाइट बनाने के लिए कहा था, जो पड़ोसी देशों को भारत की ओर से उपहार है. साथ ही चीन के प्रभाव को क्षेत्र में कम किया जा सकेगा. बीते रविवार को मन की बात कार्यक्रम में मोदी ने घोषणा की थी कि दक्षिण एशिया उपग्रह अपने पड़ोसी देशों को भारत की ओर से कीमती उपहार होगा. मोदी ने कहा था, ‘पांच मई को भारत दक्षिण एशिया उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा. इस परियोजना में भाग लेने वाले देशों की विकासात्मक जरुरतों को पूरा करने में इस उपग्रह के फायदे लंबा रास्ता तय करेंगे.

भारतीय हैकर्स का पलटवार, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी समेत 500 से ज्यादा वेबसाइट हैक

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aajtak.in [Edited By: मुन्ज़िर अहमद]

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नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2017, अपडेटेड 12:33

 कथित भारतीय हैकर्स ने पाकिस्तान की 500 से ज्यादा वेबसाइट हैक कीं. भारतीय हैकर्स ने रैंजमवेयर के जरिए पाकिस्तान की वेबसाइट हैक कीं. हैकर्स ने पाकिस्तान की ‘पाकिस्तान पीपल्स पार्टी’ की वेबसाइट भी हैक करने का दावा किया है. इससे कुछ घंटे पहले ही पाकिस्तानी हैकर्स ने भारत की टॉप यूनिवर्सिटी के अकाउंट हैक किए थे.

भारत के कथित हैकर ग्रुप ने पाकिस्तान की 500 से ज्यादा वेबसाइट्स हैक करने का दावा किया है. इनमें वो वेबसाइट्स भी शामिल हैं जो HTTPS से सिक्योर हैं.

हैक की गईं वेबसाइट्स में से ज्यादातर वेबसाइट पाकिस्तान सरकार के अधीन आती हैं. दावा किया गया है कि टीम इंडियन ब्लैक हैट नाम के एक ग्रुप ने हैकिंग को अंजाम दिया. हालांकि हैक्ड वेबसाइट के होम पेज पर टीम केरला साइबर वॉरियर्स लिखा हुआ है.

‘पाकिस्तान पीपल्स पार्टी’ की वेबसाइट भी हैक
हैकर्स ने पाकिस्तान की ‘पाकिस्तान पीपल्स पार्टी’ की वेबसाइट भी हैक करने का दावा किया है. इन वेबसाइट में वहां के सरकारी शिक्षण वेबसाइट्स भी शामिल हैं. इसके अलावा ट्रेड वेबसाइट्स और रुरल डेवेलपमेंट वेबसाइट्स भी शामिल हैं.

हमने हैकर ग्रुप से बात की तो उन्होंने बताया है कि ये सिर्फ एक ग्रुप ने नहीं किया है बल्कि कई ग्रुप ने मिलकर किया है. इसमें Luzsecind, team black hats और United Indian hackers जैसे ग्रुप्स शामिल हैं. इनका कहना है कि आने वाले समय में वहां कि और भी वेबसाइट्स को हैक किया जाएगा.

ये कोई आम हैकिंग नहीं है. बल्कि इन्होंने रैंजमवेयर का इस्तेमाल किया है. रैंजमवेयर का मतलब वेबसाइट को हैकर के कब्जे से छुड़ाने के लिए पैसे देने होते हैं. इसके लिए वेबसाइट पर हैकर्स के फेसबुक पेज की डीटेल्स हैं जहां से वो पैसे के लेन देन की बात करेंगे.

हैक की गई वेबसाइट को देखकर लगता है कि केरल साइबर वॉरियर ने किया है. यहां एक बॉक्स है जिसमें Key डालने को कहा जा रहा है. आम तौर पर हैकर रैंजम मनी लेने के बाद एक Key देते हैं जिससे वेबसाइट को वापस लिया जा सकता है.

10 भारतीय यूनिवर्सिटी की वेबसाइट की थीं हैक
मंगलवार को दिन के वक्त पाकिस्तानी हैकर्स ने भारत की 10 यूनिवर्सिटीज की वेबसाइट हैक की थीं. हैक की गई वेबसाइट्स में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी भुवनेश्वर, दिल्ली यूनिवर्सिटी, नेशनल एयरोस्पेस लैबोरैट्रीज और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की वेबसाइट शामिल हैं. हैकर्स ने इन वेबसाइट्स को हैक करके उन पर पाकिस्तान जिंदाबाद लिखा था. इसके अलावा कश्मीर के बारे में भी लिखा गया था. हैक की गई वेबसाइट्स में ज्यादातर आर्मी और डिफेंस से जुड़ी शिक्षण संस्थान शामिल हैं. इन वेबसाइट्स की हैकिंग का दावा पाकिस्तान के PHC ग्रुप ने किया है.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को  instantaajtak ने संपादित नहीं किया है, यह aajtakफीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

IIT दिल्ली, DU और AMU की वेबसाइट हैक, लिखा- पाकिस्तान जिंदाबाद

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मुन्ज़िर अहमद

नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2017

दिल्ली यूनिवर्सिटी की वेबसाइट को कथित तौर पर पाकिस्तानी हैकर्स ने हैक कर लिया. हैकर्स खुद को PHC ग्रुप का बता रहे हैं. आपको बता दें कि PHC वही ग्रुप है जिसने पिछले साल भारत की 7100 वेबसाइट को हैक करने का दावा किया था. हालांकि वेबसाइट कुछ देर के लिए ही हैक रही है और खबर लिखे जाने तक यह ठीक से काम कर रही है.

इसके अलावा इस हैकर ग्रुप ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की वेबासाइट को भी हैक करने का दावा किया है. इसके अलावा 10 शिक्षण संस्थानों की वेबसाइट इस ग्रुप ने हैक कर लिया है.

हैकर्स ने आईआईटी दिल्ली की वेबसाइट को भी हैक कर लिया है.

 इन हैकर्स ने एक लिस्ट जारी की है जिसमें भारत की नामचीन शिक्षण संस्थानों की वेबसाइट की लिस्ट है जिसे उन्होंने हैक करने का दावा किया है.

http://www.uok.ac.in
http://zone-h.org/mirror/id/29241418
http://nal.res.in
http://zone-h.org/mirror/id/29241417
http://amu.ac.in
http://zone-h.org/mirror/id/29241416
http://iitbhu.ac.in
http://zone-h.org/mirror/id/29241415
http://iitd.ac.in
http://zone-h.org/mirror/id/29241413
http://du.ac.in
http://zone-h.org/mirror/id/29241411
http://www.aimt.ac.in
http://zone-h.org/mirror/id/29241410
http://diat.ac.in
http://zone-h.org/mirror/id/29241409
http://www.aim.ac.in
http://zone-h.org/mirror/id/29241408
http://brns.res.in
http://zone-h.org/mirror/id/29240869

पिछली बार भी जब इन्होंने हैकिंग का दावा किया था उसके घंटे भर बाद सभी वेबसाइट्स को रिस्टोर कर लिया गया था. हालांकि तब कुछ भारतीय हैकर्स ने भी पाकिस्तान की कई सरकारी वेबसाइट हैक करने का दावा किया था.

गौरतलब है कि DU की वेबसाइट कमजोर है और आप देख सकते हैं कि इसके URL के आगे HTTPS भी नहीं है. साधारण शब्दों में समझ सकते हैं कि बिना HTTPS वाली वेबसाइट सिक्योर नहीं होती हैं.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को  instantaajtak ने संपादित नहीं किया है, यह aajtakफीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

JIO को हुआ इतने का घाटा…

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BHASHA [Edited by: सतीश कुमार]

मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली नई टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो का शुद्ध घाटा अक्टूबर-मार्च दौरान 22.5 करोड़ रुपये रहा है. जियो के लिए ये ऐसा समय रहा है जब कंपनी ने कोई कमाई नहीं कि बल्कि लगातार ग्राहकों को नए-नए ऑफर्स दिए गए.

शेयर बाजार को दी जानकारी में कंपनी ने बताया कि एक साल पहले इस ड्यूरेशन में कंपनी का नेट लॉस 7.46 करोड़ रुपये था. गौरतलब है कि जियो ने सितंबर 2016 में अपनी सेवाएं शुरू की थीं. जियो हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज की लिस्टेड यूनिट नहीं है ऐसे में उसे अपनी तिमाही के रिजल्ट की जानकारी देने की जरुरत नहीं है.

पूरे फायनेंशियल इयर के आंकड़ें बताते हैं कि 2016-17 में कंपनी का शुद्ध घाटा 31.37 करोड़ रुपये रहा है जो 2015-16 के फायनेंशियल इयर में 15.71 करोड़ रुपये था. वैसे अभी भी कंपनी का धन धना धन ऑफर जारी है. ग्राहकों के लिए ये हैं ऑफर्स-

Prime मेंबर्स के लिए ऑफर
पहले से बने प्राइम मेंबर्स के लिए प्लान है जिसमें 309 रुपये में अनलिमिटेड डेटा, फ्री वॉयस कॉल, अनलिमिटेड SMS और जियो ऐप्स एक्सेस के साथ 1GB डेटा प्रतिदिन मिलेगा, दूसरा प्लान है जिसमें 509 रुपये में सारे ऑफर वैसे ही होंगे केवल डेटा 2GB तक उपयोग करने की सुविधा अलग से मिलेगी.

जो Jio प्राइम मेंबर नहीं हैं उनके लिए ये है ऑफर
नॉन जियो प्राइम मेंबर्स के लिए जो प्लान है इसमें नए सिम लेने वाले भी शामिल हैं उसमें अनलिमिटेड डेटा, फ्री वॉयस कॉल, अनलिमिटेड SMS और जियो ऐप्स के फ्री एक्सेस पाने के लिए 408 (309+99) रुपये का रिचार्ज काराना होगा इसमें प्रतिदिन डेटा उपयोग कि लिमिट 1GB होगी और दूसरे प्लान में 608 (509+99) रुपये के रिचार्ज में 2GB डेटा उपयोग की लिमिट होगी.

उदाहरण के तौर पर अगर आप जियो प्राइम मेंबर है, लेकिन इसके बाद कोई रीचार्ज नहीं कराया है तो आप 309 रुपये का रीचार्ज करा सकते हैं. लेकिन आपको 99 रुपये का भी रीचार्ज कराना होगा. इसकी वैलिडिटी 84 दिन की होगी और आपको अनलिमिटेड कॉलिंग मिलेगी. इसके साथ ही आप हर दिन 1GB डेटा भी यूज कर सकते हैं.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को  instantaajtak ने संपादित नहीं किया है, यह aajtakफीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

दिल्ली मेट्रो में युवक ने कहा- पाकिस्तान चले जाओ

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aajtak.in [edited by: मोहित ग्रोवर]

नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2017, अपडेटेड 09:56 IST

दिल्ली की शान कहे जानी वाली दिल्ली मेट्रो से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि मेट्रो में सफर के दौरान कुछ युवाओं के ग्रुप ने एक मुस्लिम बुजुर्ग व्यक्ति को सीट ना मिलने पर कहा कि जाओ, पाकिस्तान चले जाओ और बुजुर्ग के साथ बदसलूकी भी की. इस दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने बुजुर्ग की मदद की. साथ ही वहां मौजूद AICCTU के नेशनल सेक्रेटरी संतोष रॉय ने भी मामले को सुलझाने में मदद की.
 

यह मामला महिला अधिकार कार्यकर्ता कविता कृष्णन ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये शेयर किया. पोस्ट में कविता ने लिखा कि युवाओं ने बुजुर्ग के साथ बदसलूकी की और उनके कपड़ों का भी मजाक उड़ाया. पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जब रॉय ने लड़कों से बुजुर्ग से माफी मांगने को कहा कि तो उन्होंने मना किया और कहा कि जाओ, पाकिस्तान चले जाओ.

हालांकि, खान मार्केट मेट्रो स्टेशन के पास गार्ड आया, उसके बाद इस मामले की शिकायत दर्ज की गई. कविता ने अपने पोस्ट में लिखा कि बुजुर्ग ने दोनों युवकों की माफी को कबूल कर लिया है, और आगे से ऐसी गलती ना दोहराने को कहा है.

आपको बता दें कि दिल्ली मेट्रो में कई बार बदसलूकी का मामला सामने आ चुका है. इसके साथ ही कई बार धर्म को लेकर लोगों को निशाना बनाया जा चुका है.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को  instantaajtak ने संपादित नहीं किया है, यह aajtakफीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

PAK का ना’पाक’ जनरल, ‘ऑपरेशन टोपाक’ और इस तरह पड़ी कश्मीर में आतंकवाद की नींव

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कश्मीर में लगातार आतंकवाद पैर पसार रहा है. इतना ही नहीं अब वहां के स्थानीय युवक भी हाथों में पत्थर लेकर सुरक्षाबलों के सामने खड़े हो गए हैं. हाल फिलहाल में कई मौकों पर स्थानीय युवक हाथों में पत्थर लेकर आतंकियों की ढाल बनकर भारतीय सेना के सामने खड़े रहे. पिछले साल 8 जुलाई को हिजबुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर ब्वॉय आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर में ढेर किए जाने के बाद से घाटी में एकाएक तनाव और पत्थरबाजी की घटनाएं बढ़ गई हैं. घाटी में बढ़ती आतंकी और पत्थरबाजी घटनाओं के पीछे पाकिस्तान का हाथ माना जाता है. घाटी में इस तरह का तनाव कोई नया नहीं है. विभाजन के बाद से ही पाकिस्तान लगातार भारत के इस इलाके में अशांति फैलाता रहा है. भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद 1947 से जारी है. इसको लेकर पाकिस्तान ने भारत पर तीन बार हमला किया और तीनों बार उसे बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा.

इस जनरल ने रखी आतंक की नींव
1971 में शर्मनाक हार के बाद काबुल स्थित पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी में सैनिकों को हार का बदला लेने की शपथ दिलाई गई और अगले युद्ध की तैयारी को अंजाम दिया जाने लगा, लेकिन इस बीच अफगानिस्तान में हालात बिगड़ने लगे. 1971 से 1988 तक पाकिस्तान की सेना और कट्टरपंथी अफगानिस्तान में उलझे रहे. यहां पाकिस्तान की सेना ने खुद को गुरिल्ला युद्ध में मजबूत बनाया और युद्ध के विकल्पों के रूप में नए-नए तरीके सीखे. अब यही तरीके भारत पर आजमाने की बारी थी. तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जिया-उल-हक ने 1988 में भारत के खिलाफ ‘ऑपरेशन टोपाक’ नाम से ‘वॉर विद लो इंटेंसिटी’ की योजना बनाई. इसके तहत कश्मीर के लोगों के मन में अलगाववाद और भारत के प्रति नफरत के बीज बोने थे और फिर उन्हीं के हाथों में हथियार थमाने थे.

…जब कश्मीर से हटा भारत का ध्यान
पाकिस्तान ने भारत के पंजाब में आतंकवाद शुरू करने के लिए पाकिस्तानी पंजाब में सिखों को ‘खालिस्तान’ का सपना दिखाया और हथियारबद्ध सिखों का एक संगठन खड़ा करने में मदद की. पाकिस्तान के इस खेल में भारत सरकार उलझती गई. स्वर्ण मंदिर में हुए ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार और उसके बदले की कार्रवाई के रूप में 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने देश की बागडोर संभाली. राजीव गांधी ने कश्मीर की तरफ से पूरी तरह से ध्यान हटाकर पंजाब और श्रीलंका में लगा दिया. इंदिरा गांधी के बाद भारत की राह बदल गई. इससे पंजाब में आतंकवाद के नए खेल के चलते पाकिस्तान एक बार फिर कश्मीर पर नजरें टिकाने लगा और उसने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में लोगों को आतंक के लिए तैयार करना शुरू किया. अफगानिस्तान का अनुभव यहां काम आने लगा था.

‘ऑपरेशन टोपाक’ का ही हिस्सा है पत्थरबाजी
भारतीय राजनेताओं के ढुलमुल रवैये के चलते कश्मीर में ‘ऑपरेशन टोपाक’ बगैर किसी परेशानी के चलता रहा. अब दुश्मन का इरादा सिर्फ कश्मीर को ही अशांत रखना नहीं रहा, वे जम्मू और लद्दाख में भी सक्रिय होने लगे. पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने मिलकर कश्मीर में दंगे कराए और उसके बाद आतंकवाद का सिलसिला चल पड़ा. कश्मीर में आतंकवाद के चलते करीब 7 लाख से अधिक कश्मीरी पंडित विस्थापित हो गए और वे जम्मू सहित देश के अन्य हिस्सों में जाकर रहने लगे. इस दौरान हजारों कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतार दिया गया. घाटी में मस्जिदों की तादाद बढ़ाना, गैर मुस्लिमों और शियाओं को भगाना और बगावत के लिए जनता को तैयार करना ‘ऑपरेशन टोपाक’ के ही चरण हैं. इसी के तहत कश्मीर में सरेआम पाकिस्तानी झंडे लहराए जाते हैं और भारत की खिलाफत ‍की जाती है. पत्थरबाजी और आतंकियों की घुसपैठ भी इसी का हिस्सा है.

घाटी में अशांति के लिए फंडिंग करता ISI
आईएसआई ने कश्मीर में अपनी गतिविधियों को प्रायोजित करने के लिए हर महीने 2.4 करोड़ खर्च करता है. इस कार्यक्रम के तहत, आईएसआई ने लश्कर-ए-तैयबा सहित कश्मीर में 6 आतंकवादी समूहों को बनाने में मदद की. अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि आईएसआई लगातार लश्कर-ए-तैयबा को सुरक्षा प्रदान करता है.