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PAK के मंसूबों पर सेना की पैनी नजर, BAT से निपटने को बनाई खास रणनीति

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जम्मू कश्मीर में हालिया आतंकी हमलों के बाद भविष्य में ऐसे हमले रोकने के लिए भारतीय सेना ने नई रणनीति बनाई है. सेना का खास जोर आतंकियों की घुसपैठ रोकने पर है और इसके लिए पाकिस्तानी सीमा से सटे घाटी के कुछ खास इलाकों में जवानों की तैनाती में बढ़ाने जा रहा है.

आजतक को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, आतंकी इन दिनों घुसपैठ के लिए 8 नए रास्ते अपना रहे हैं, जिसमें कश्मीर के महादेव से कालाकोट, कोतकोटेरा से काला कोटे और निकैल से मंजी कोटे का रास्ता प्रमुख रूप से निशानदेही पर है. सेना के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए सैनिकों की टुकड़ी को पीर पंजाल के दक्षिणी इलाकों से घाटी और दूसरे इलाकों की तरफ भेजा जा रहा है.

हाल के महीनों में पाकिस्तानी सेना की बॉर्डर एक्शन टीम (BAT) की चार कार्रवाइयों को सेना ने नाकाम किया है. BAT से निपटने के लिए सेना ने अब नई योजना बनाई है और उसके नापाक मंसूबों को नाकाम करने के लिए सेना ने स्थानीय कमांडरों को खास निर्देश जारी किए हैं.

बता दें कि पाकिस्तानी सेना ने इसी हफ्ते सोमवार को जम्मू कश्मीर में मेंढर सेक्टर में भारी गोलीबारी कर भारतीय सेना के दो जवानों को शहीद कर दिया था. इस गोलीबारी की वजह से वहां काफी धुआं फैल गया था और इसी का फायदा उठा कर पाकिस्तानी सेना के मुजाहिद लड़ाकों ने भारतीय सीमा में घुसकर भारतीय जवानों के शव क्षत-विक्षत कर दिए.

सेना को मिली खुफिया जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा (LoC)के पार उसके कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 4-5 कैंप सक्रीय हैं. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, नियंत्रण रेखा से 10-15 किलोमीटर अंदर स्थित इन कैंपों में पाक सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) ने पिछले महीने बैट टीम को ट्रेनिंग दी थी.

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सेना के DGMO लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट ने हॉटलाइन पर अपने पाकिस्तानी समकक्ष मेजर जनरल शाहिर शमशाद ने बात की और उनसे PoK में चल रही इन BAT कैंप को तत्काल बंद करने को कहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तानी सेना ने इन कैंपों को तुरंत बंद नहीं किया तो उसे इसके नतीजे भुगतने होंगे .

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को  instantaajtak ने संपादित नहीं किया है, यह aajtakफीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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केदारनाथ मंदिर में PM मोदी, मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का किया रुद्राभिषेक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रुद्रप्रयाग जिले में स्थित भगवान शिव के धाम केदारनाथ में पूजा-अर्चना करने पहुंचे. दरअसल आज ही बाबा केदारनाथ के कपाट खुले हैं और सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाबा का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा केदारनाथ का रुद्राभिषेक किया.

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पीएम मोदी ने मंदिर में करीब आधे घंटे तक भगवान शिव की पूजा-अर्चना की. इसके बाद पीएम मोदी जब बाहर आए तब उन्हें वहां के पुजारियों ने विशेष स्मृति चिह्न भी भेंट किए. उन्हें केदारनाथ मंदिर की लकड़ी की बनी एक छोटी सी प्रतिकृति के अलावा एक तस्वीर और एक पटका दिया गया.

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इसके बाद प्रधानमंत्री ने केदारनाथ मंदिर के आसपास एकत्र लोगों के करीब जाकर उनका अभिवादन भी स्विकार किया. पीएम मोदी के इस कार्यक्रम को देखते हुए केदारनाथ में खास तैयारियां की गई थी. पीएम के लिए मंदिर के पास खास हेलीपैड बनाया गया है और सुरक्षा के लिहाज से मंदिर के नजदीक ही सेफ रूम बनाया गया है.

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पीएम मोदी बुधवार सुबह ही देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पहुंच चुके हैं, वहां से हेलीकॉप्टर के जरिये सीधे केदारनाथ मंदिर पहुंचे. प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर अपनी इस उत्तराखंड यात्रा की जानकारी दी थी.

Tomorrow I will be visiting Dev Bhoomi Uttarakhand. I will begin my Uttarakhand visit by praying at the Kedarnath Temple.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, केदारनाथ में पूजा-अर्चना करने के बाद पीएम मोदी दिन में करीब सवा दस बजे हेलीकॉप्टर से हरिद्वार के लिए रवाना हो गए. प्रधानमंत्री वहां योग गुरु बाबा रामदेव के पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट का उद्घाटन करेंगे. वहां उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वह दोपहर करीब 1 बजे दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे.

I will be inaugurating the Patanjali Research Institute at Patanjali Yogpeeth, Haridwar tomorrow, 12 noon onwards. @yogrishiramdev

गौरतलब है कि राज्य में सरकार के शपथग्रहण में शामिल होने के बाद पीएम मोदी का यह पहला उत्तराखंड दौरा है. इससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने राज्य में कई विशाल जनसभाओं को संबोधित किया था. पीएम के कुशल नेतृत्व में राज्य में बीजेपी को जबर्दस्त सफलता मिली और पार्टी राज्य की सत्ता में आ गई. विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस को मात देते हुए 70 में से 57 सीटों पर कब्जा जमाया था. इस पहाड़ी राज्य में इस प्रचंड बहुमत के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने थे. उनके शपथ-ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे.

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PAK का ना’पाक’ जनरल, ‘ऑपरेशन टोपाक’ और इस तरह पड़ी कश्मीर में आतंकवाद की नींव

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कश्मीर में लगातार आतंकवाद पैर पसार रहा है. इतना ही नहीं अब वहां के स्थानीय युवक भी हाथों में पत्थर लेकर सुरक्षाबलों के सामने खड़े हो गए हैं. हाल फिलहाल में कई मौकों पर स्थानीय युवक हाथों में पत्थर लेकर आतंकियों की ढाल बनकर भारतीय सेना के सामने खड़े रहे. पिछले साल 8 जुलाई को हिजबुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर ब्वॉय आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर में ढेर किए जाने के बाद से घाटी में एकाएक तनाव और पत्थरबाजी की घटनाएं बढ़ गई हैं. घाटी में बढ़ती आतंकी और पत्थरबाजी घटनाओं के पीछे पाकिस्तान का हाथ माना जाता है. घाटी में इस तरह का तनाव कोई नया नहीं है. विभाजन के बाद से ही पाकिस्तान लगातार भारत के इस इलाके में अशांति फैलाता रहा है. भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद 1947 से जारी है. इसको लेकर पाकिस्तान ने भारत पर तीन बार हमला किया और तीनों बार उसे बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा.

इस जनरल ने रखी आतंक की नींव
1971 में शर्मनाक हार के बाद काबुल स्थित पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी में सैनिकों को हार का बदला लेने की शपथ दिलाई गई और अगले युद्ध की तैयारी को अंजाम दिया जाने लगा, लेकिन इस बीच अफगानिस्तान में हालात बिगड़ने लगे. 1971 से 1988 तक पाकिस्तान की सेना और कट्टरपंथी अफगानिस्तान में उलझे रहे. यहां पाकिस्तान की सेना ने खुद को गुरिल्ला युद्ध में मजबूत बनाया और युद्ध के विकल्पों के रूप में नए-नए तरीके सीखे. अब यही तरीके भारत पर आजमाने की बारी थी. तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जिया-उल-हक ने 1988 में भारत के खिलाफ ‘ऑपरेशन टोपाक’ नाम से ‘वॉर विद लो इंटेंसिटी’ की योजना बनाई. इसके तहत कश्मीर के लोगों के मन में अलगाववाद और भारत के प्रति नफरत के बीज बोने थे और फिर उन्हीं के हाथों में हथियार थमाने थे.

…जब कश्मीर से हटा भारत का ध्यान
पाकिस्तान ने भारत के पंजाब में आतंकवाद शुरू करने के लिए पाकिस्तानी पंजाब में सिखों को ‘खालिस्तान’ का सपना दिखाया और हथियारबद्ध सिखों का एक संगठन खड़ा करने में मदद की. पाकिस्तान के इस खेल में भारत सरकार उलझती गई. स्वर्ण मंदिर में हुए ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार और उसके बदले की कार्रवाई के रूप में 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने देश की बागडोर संभाली. राजीव गांधी ने कश्मीर की तरफ से पूरी तरह से ध्यान हटाकर पंजाब और श्रीलंका में लगा दिया. इंदिरा गांधी के बाद भारत की राह बदल गई. इससे पंजाब में आतंकवाद के नए खेल के चलते पाकिस्तान एक बार फिर कश्मीर पर नजरें टिकाने लगा और उसने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में लोगों को आतंक के लिए तैयार करना शुरू किया. अफगानिस्तान का अनुभव यहां काम आने लगा था.

‘ऑपरेशन टोपाक’ का ही हिस्सा है पत्थरबाजी
भारतीय राजनेताओं के ढुलमुल रवैये के चलते कश्मीर में ‘ऑपरेशन टोपाक’ बगैर किसी परेशानी के चलता रहा. अब दुश्मन का इरादा सिर्फ कश्मीर को ही अशांत रखना नहीं रहा, वे जम्मू और लद्दाख में भी सक्रिय होने लगे. पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने मिलकर कश्मीर में दंगे कराए और उसके बाद आतंकवाद का सिलसिला चल पड़ा. कश्मीर में आतंकवाद के चलते करीब 7 लाख से अधिक कश्मीरी पंडित विस्थापित हो गए और वे जम्मू सहित देश के अन्य हिस्सों में जाकर रहने लगे. इस दौरान हजारों कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतार दिया गया. घाटी में मस्जिदों की तादाद बढ़ाना, गैर मुस्लिमों और शियाओं को भगाना और बगावत के लिए जनता को तैयार करना ‘ऑपरेशन टोपाक’ के ही चरण हैं. इसी के तहत कश्मीर में सरेआम पाकिस्तानी झंडे लहराए जाते हैं और भारत की खिलाफत ‍की जाती है. पत्थरबाजी और आतंकियों की घुसपैठ भी इसी का हिस्सा है.

घाटी में अशांति के लिए फंडिंग करता ISI
आईएसआई ने कश्मीर में अपनी गतिविधियों को प्रायोजित करने के लिए हर महीने 2.4 करोड़ खर्च करता है. इस कार्यक्रम के तहत, आईएसआई ने लश्कर-ए-तैयबा सहित कश्मीर में 6 आतंकवादी समूहों को बनाने में मदद की. अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि आईएसआई लगातार लश्कर-ए-तैयबा को सुरक्षा प्रदान करता है.

PAK की नई चाल, UN को सौंपेगा ‘सबूत’ कुलभूषण जाधव के खिलाफ

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instantaajtak.wordpress.com [Edited By: राम कृष्ण]

भारतीय नौसेना के अधिकारी कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान ने अब नई चाल चली है. पाक ने कुलभूषण जाधव के खिलाफ नया डोजियर तैयार किया है, जिसे वह सबूत के तौर पर संयुक्त राष्ट्र में पेश करेगा. मालूम हो कि पाक ने कुलभूषण जाधव को जासूसी करने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया है. पाकिस्तान ने जाधव को मार्च 2016 में गिरफ्तार किया था. इस मसले को लेकर दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहद खराब हो गए हैं.

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक नया डोजियर एक वीडियो और कोर्ट के समक्ष दिए गए कुलभूषण के बयान के आधार पर तैयार किया गया है. इस वीडियो में कुलभूषण का कथित तौर पर कबूलनामा है. पाक का आरोप है कि जाधव कराची और बलूचिस्तान में जासूसी और गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल रहा है. इसमें कोर्ट मार्शल जनरल की प्रमाणित रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है. इसके अलावा जाधव के खिलाफ अदालत में चलाई गई कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है.

भारत ने मांगी चार्जशीट और फैसले की प्रति
शुक्रवार को पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त गौतम बंबावाले ने पाक से जाधव के खिलाफ दाखिल चार्जशीट और फैसले की प्रति उपलब्ध कराने को कहा. भारत ने पाक को इस बात से भी अवगत करा दिया कि वह जाधव मसले पर फैसले के खिलाफ अपील करेगा. इसके लिए पाकिस्तान आर्मी एक्ट का अध्ययन किया जा रहा है. पाकिस्तानी विदेश सचिव तेहमीना जंजुआ से मुलाकात कर बंबावाले ने जाधव तक राजनयिक पहुंच की मांग भी की. हालांकि पाक ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए इसको खारिज कर दिया. भारत की ओर से जाधव तक राजनयिक पहुंच की अपील 14वीं बार की गई थी.

पाक की दलील
पाक विदेश सचिव तेहमीना जंजुआ ने दलील दी कि यह मामला जासूसी से जुड़ा होने के चलते जाधव तक राजनयिक पहुंच की इजाजत नहीं दी जा सकती है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दूसरे देश के आरोपी नागरिक को उस देश के राजनयिक से मुलाकात की इजाजत देने का प्रावधान है. ऐसे में पाक अंतरराष्ट्रीय कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है.

भारत ने दी कड़ी चेतावनी
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जाधव को लेकर पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि जाधव के खिलाफ इतना कड़ा फैसला लेने में पाकिस्तान सावधानी बरते. वरना उसको इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पाक के इस कदम से दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते खराब हो सकते हैं.

भारत-पाक रिश्ते और बिगड़े
पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार कर कुलभूषण जाधव को फांसी देने के चलते दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहद खराब हो गए हैं. भारत ने पाक के साथ हर स्तर की वार्ता रोक दी है. जहां एक ओर पाकिस्तान ने कुलभूषण से भारतीय राजदूत से मुलाकात की अपील को 14वीं बार खारिज कर दिया हैं, वहीं भारत ने पाकिस्तान के साथ सभी तरह की द्विपक्षीय बातचीत पर रोक लगा दी है. शुक्रवार को भारत सरकार ने समुद्री सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान के साथ 17 अप्रैल को होने वाली वार्ता को भी रद्द कर दिया है. इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान को सीधे तौर पर अवगत करा दिया कि वह पाकिस्तान मैरीटाइम सिक्युरिटी एजेंसी (PMSA) के प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी करने को कतई तैयार नहीं. यह प्रतिनिधिमंडल रविवार को भारत आने वाला है.

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दक्षिण एशिया के लिए सैटेलाइट लॉन्च करेगा भारत, PAK को छोड़ सभी को होगा फायदा

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भारत जल्द ही पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र के लिए एक सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है, जो पाकिस्तान के अलावा बाकी सभी पड़ोसियों के लिए फायदेमंद होगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) 5 मई को ‘साउथ एशिया सैटेलाइट’ लॉन्च कर सकता है, जिसकी 2014 में घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने ‘अपने पड़ोसी देशों के लिए उपहार’ बताया था.

5 मई को श्रीहरिकोटा से होगी लॉन्चिंग इसरो के अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने बताया कि मई के पहले हफ्ते में सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना है और पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट में शामिल नहीं है. इसरो सूत्रों के मुताबिक इस संचार सैटेलाइट (GSAT-9) को एजेंसी के GSLV-09 रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाएगा.

12 वर्षों तक मिशन पर रहेगा सैटेलाइट किरण कुमार ने बताया कि प्रक्षेपण के वक्त 2,195 द्रव्यमान का यह सैटेलाइट 12 केयू-बैंड ट्रांसपॉन्डर को ले जाएगा. किरण कुमार के मुताबिक पाकिस्तान इस परियोजना का हिस्सा नहीं बनना चाहता. सूत्रों की मानें तो इस सैटेलाइट को ऐसे डिजाइन किया गया है कि ये अपने मिशन पर 12 वर्षों तक सक्रिय रहेगा.

पहले ‘सार्क सैटेलाइट’ रखा गया था नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में काठमांडू में हुए सार्क सम्मेलन के दौरान इस सैटेलाइट की घोषणा करते हुए इसे भारत के पड़ोसियों के लिए उपहार बताया था. पहले इस सैटेलाइट का नाम ‘सार्क सैटेलाइट’ रखा गया था, लेकिन पाकिस्तान के इसमें शामिल ना होने से इसे ‘साउथ एशिया सैटेलाइट’ नाम दिया गया.

दक्षिण एशियाई देशों को समर्पित सैटेलाइट इस सैटेलाइट का निर्माण संचार, आपदा सहायता और दक्षिण एशियाई देशों के बीच संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है. इस प्रोजेक्ट में शामिल देशों को सैटेलाइट के जरिए DTH और आपदा के समय जानकारी साझा करने में सहायता मिलेगी.

जब इसरो ने लॉन्च किए 104 सैटेलाइट सूत्रों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में शामिल देश अपने आंतरिक प्रयोग के लिए 36 से 54 मेगाहर्टज का ट्रांसपोंडर इस्तेमाल कर सकते हैं. फरवरी में एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च कर अंतरिक्ष एजेंसी ISRO एक रिकॉर्ड कायम कर चुकी है.